Tuesday, 21 June 2016


                 यक्ष प्रश्न की एक शाम 


एक शाम मैं समय बिताने के उद्देश्य से समीप के ही एक पार्क में जा पहुँचीलगभग पैंतीस से चालीस मिनट तक मैंने तेज चाल से पार्क के कई चक्कर लगाएऔर इसमें बनी बैंच पर आकर बैठ गईबराबर वाली बैंच पर एक छात्रा बैठी कुछ-कुछ लिखा-पढ़ी कर रही थी मेरे पास मोबाइल था सो मैं भी उसमें उलझ गई कुछ समय बाद एक बड़ी उम्र की महिला मेरे और छात्रा के बीच आकर बैठ गई बैठते ही उन्होंने हम दोनों से पानी के लिए पूछा जो वो अपने साथ लायीं थी | छात्रा के पास तो पानी था और मैं ठंडा पानी नहीं पीती हूँ सो हम दोनों ने ही बड़े प्रेम से उन्हें मना किया एवं उन्हें 
धन्यवाद कहा |
उन आंटी ने हमसे बतियाना शुरू कर दिया छात्रा को शायद यह नहीं भाया सो वह चली गई इस समय तक पार्क में हलकी ठंडक हो चली थी एवं अँधेरा भीआंटी ने अपनी बातें जारी रखींअब मैं अकेली उनकी बातें सुन रही थी उनका पहला प्रश्न था - आस-पास रहती हो मैंने हाँ कहाउनके पूछने पर रहने का पता भी बता दिया ,यह भी बता दिया कि मैं यहाँ इस अनजान शहर में किस लिए आई हूँ |" अच्छा -अच्छा तो तुम ग़ाज़ियाबाद में रहती हो मेरी बड़ी बहन भी वहीं रहती है संजय नगर में बहुत बीमार है वो,पता नहीं बचेगी भी या नहीं"| मैंने कहा "आंटी आप मिल आइये उनसे ,देख आइये उनको|" वे बोलीं "अरे बेटा अब कहाँ जा पाऊँगी मेरी अपनी समस्याएँ हैं घुटनों में दरद रहता है वैसे तो हम अभी तीन महीने पहले ही मिले थेतुमने यमुना नगर का नाम सुना है?" मैंने कहा -हाँ हरियाणा वाला न आंटी ने अपनी बात आगे बढ़ाई बोलीं -" वहाँ हमारा मायका है ,हम पाँच बहिनें हैं सबसे बड़ी वाली गाजियाबाद में रहती हैं,दूसरी को कैंसर था तो वो अब नहीं है|" यह बताते हुए आंटी की आँखे भीग गई थीं | "तीसरी वहीँ यमुनानगर के पास रहती हैं,और एक यमुनानगर में ही रहती है हम सब साल में एक बार वहीं इकठ्ठे मिल लेते हैं"आंटी की उम्र देखते हुए स्पष्ट था कि उनके माता-पिता अब नहीं होंगेमैंने उनसे पूछा कि आपके मायके में कौन-कौन है आंटी ने बड़े ही गर्व से बताया कि तीन भाई -भाभी और नौ भतीजे हैं | मुझे बड़ा ही सुखद आश्चर्य हुआ क्योंकि हमारा भी बड़ा और संयुक्त परिवार रहा हैआज जिस तरह से तेज गतिमान जिंदगी में ,जिसमें केवल स्वार्थ एवं बिखरते संयुक्त परिवार हैंन रिश्तों की अहमियत है न ही सम्मान है | मुझे ऐसे संयुक्त परिवार के बारे में जानने को मिला जिसमें उम्र के अंतिम पड़ाव में  पहुँचने पर भी अपने भाई-बहनों के प्रति वही बचपन वाला स्नेह ,वही देखभाल और वैसा ही दर्द महसूस करना मन को संतोष हुआ कि हमारी संस्कृति एवं परम्पराएँ आज भी जीवित हैं| मानवता एवं अपने दायित्वों के प्रति संवेदनशील होना जीवन का अटूट हिस्सा हैखैर आगे बढ़ते हैं ,आंटी ने जो भी बातें मुझसे साझा कीं वे मेरी अपनी धरोहर बन गई हैं एक बात जो उन्होंने मुझसे कही वो सचमुच अनमोल है ,जिसमें  रिश्तों के प्रति प्रेम ,सम्मान ,आत्मीयता दर्द एवं पीड़ा छुपी हुई थी| उन्होंने मुझसे कहा कि - "मैं तुम्हें कुछ रूपये दूँ तो क्या तुम मेरी बहन को दे दोगी वो अकेली है|" यह बात बताते हुए अपनी बहन के लिए जो व्याकुलता एवं पीड़ा वो छुपाने का प्रयास कर रहीं थीं उस पीड़ा को मैं भलीभांति महसूस कर रही थी सोच रही थी कि कितना प्यार करती हैं ये अपनी बहन से जो अपनी तकलीफों में भी अपनी बहन के दुखों को दूर करने की चाहत रखती हैं| ये संस्कार नहीं तो और क्या हैं धन्य हैं आंटी और उनके भाई-बहन जो शरीर में आँखों की भांति हैं जब शरीर का कोई भी अंग घायल हो तो दोनों आँखें गीली होती हैं|
आंटी और मैं एक दूसरे के लिए बिलकुल अनजान थे आंटी दिल खोलकर अपनी बातें मुझसे साझा कर रहीं थीं ,कारण स्पष्ट था कि मैं उनकी बहन के शहर से थीं और  मैं उनकी बातें ध्यान से सुन रही थी इसमें मेरा  भी स्वार्थ था कि  आंटी में मुझे मेरी माँ दिखाई दे रहीं थीं| मैंने भी अपनी माँ को मेरी मौसी के लिए चिंतित होते हुए कई बार देखा था|
वर्तमान समय में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आज न तो कोई किसी के घर जाना -रहना पसंद करता है और न ही कोई किसी का दायित्व उठाना | कुछ दशक पहले तक दायित्वों का निर्वाह बड़े ही प्रेम से किया जाता था ,जिसमें आत्मीयता पूर्णतः झलकती थीउनसे हुई इस छोटी सी मुलाकात ने मेरे सामने यक्ष प्रश्न रख दिए कि क्या आज समाज में संयुक्त परिवारों का विघटन जारी रहने दिया जाए या इसे एक सूत्र में पिरोकर पुनः स्थापित किया जाए ?
निष्कर्ष यह है कि रुपया -पैसा,ज़मीन-जायदादधन-दौलत  इंसान  कितना भी जोड़ ले सब बेकार है यदि उसके पास  अपनों के प्रति प्यार एवं संवेदनशीलता तथा कर्त्तव्यों की पूर्ति के लिए समर्पण नहीं हैमेरे विचार से संयुक्त परिवारों को बढ़ावा दिया जाए  इससे परिवार का  प्रत्येक सदस्य अपने-अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होगाफिर आंटी या फिर मेरी माँ की तरह कोई भी अपनों के लिए व्यथित नहीं होगाइससे न केवल हम आज लाभान्वित होंगे बल्कि भावी पीढ़ी को बुजुर्गों के मार्ग दर्शन से सही दिशा निर्देश भी मिलेगा और आज जो वृद्धाश्रम की नई जहरीली पौध ने जन्म लिया है उसका जड़ से ही समापन होगा |