राजा सगर का नाम तो सभी ने सुना ही
होगा, हाँ वही राजा सगर जिनके सौ पुत्रों को तारने के लिए राजा भागीरथ ने कठिन
तपस्या करके गंगा जी को पृथ्वी पर लाने का असंभव कार्य संभव कर दिखाया था | उन्हीं राजा सगर के नाम बारे में एक रोचक कथा महाऋषि वाल्मीकि ने रामायण
में बताई है |
आपको यह तो ज्ञात होगा ही कि भगवान श्री राम की वंशावली बहुत बड़ी है और सबके
बारे में बताना भी संभव नहीं होगा तो आगे बढ़ते हैं | राजा सगर के पिता का नाम था
असित | एक बार वे शत्रुओं का सामना करते हुए प्रवासी हो गए
और हिमालय पर रहने लगे | उनकी दो रानियाँ थीं | वे दोनों भी उनके साथ थीं | राजा असित हिमालय पर ही
मृत्यु को प्राप्त हो गए | उनकी दोनों पत्नियाँ गर्भवती थीं | ऐसा सुना गया है | उनमें से एक रानी ने दूसरी रानी
को जिसका नाम कालिंदी था, विषयुक्त भोजन दिया जिससे उसका
बच्चा मर जाए | कालिंदी एक उत्तम पुत्र को पाना चाहती थी | इसके लिए उसने महाऋषि च्यवन से प्रार्थना की |
उन्होंने उसे आश्वासन दिया कि तुम गर के साथ ही एक महापराक्रमी, बलवान, महातेजस्वी बालक को जन्म दोगी | समय आने पर रानी ने एक बालक को जन्म दिया जो गर के साथ ही उत्पन्न हुआ | इस कारण वह राजकुमार सगर के नाम से विख्यात हुआ |
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