Friday, 17 February 2017

                                 बहादुर रमती
रमती अपने माता-पिता की एकमात्र संतान है | वह बड़ी ही होनहार  एवं बहादुर बच्ची है | माँ नैनी तथा पिता गोपी की संतान रमती अपने नाम के अनुरूप ही सबके ह्रदय में रमती है | जब नैनी ने रमती को जन्म दिया था तभी गोपी से वचन लिया था कि हम अपनी बेटी को खूब पढ़ाएंगे और रमती का कोई भाई-बहन नहीं होगा | अतः रमती अकेली है | रमती के माता-पिता निरक्षर हैं | फिर भी अपने वचन के अनुसार उन्होंने रमती का दाखिला गाँव के विद्यालय में करवा दिया | रमती शुरू से ही मेधावी छात्रा थी वह पढाई के अलावा विद्यालय में होने वाली हर गतिविधि में भाग लेती और पुरस्कार भी जीतती | माता-पिता अपनी पुत्री की सफलता देख-देखकर फूले न समाते | धीरे-धीरे रमती बड़ी हो रही थी | गाँव में कोई भी अच्छा चिकित्सालय नहीं है | रमती को यह बात बड़ी कचोटती है कि गाँव के हर व्यक्ति को छोटी-छोटी बीमारी की चिकित्सा के लिए पास के शहर में जाना पड़ता है | रमती ने डॉ बनकर मानव सेवा करने का निश्चय किया | गाँव से शहर जाने के लिए न तो पक्की सड़क है न ही कोई यातायात का ऐसा साधन जो जल्दी ही हस्पताल पहुंचा दे | प्रगतिशील देश होने के बाद भी उसके गाँव की ऐसी दशा है | हाँ एक बात अच्छी है कि उसके विज्ञान के अध्यापक बहुत ही सुलझे विचारों के हैं | वे अपने छात्रों को नई दिशा देने का भरसक प्रयास करते हैं | उन्हीं के प्रयासों के कारण ही विद्यालय में चित्रकला, संगीत, पाककला तथा आत्मसुरक्षा के लिए भी प्रशिक्षण दिया जाने लगा है | रमती ने भी अपनी रूचि के अनुसार तैराकी एवं कराटे के प्रशिक्षण के लिए अपना नाम दे दिया | अब वह प्रतिदिन तालाब में तैरने का अभ्यास करती और सप्ताह में दो दिन कराटे की कक्षा में जाती | तैराकी में रमती काफी निपुण हो चुकी थी |
एक दिन रमती प्रतिदिन की भांति अभ्यास के लिए घर से निकली | वह तालाब के पास पहुँची ही थी कि उसका मन अपनी आगे की पढाई के बारे में सोचने लगा | वह मन ही मन योजना बना रही थी कि डॉ बनने के लिए बहुत पैसों की जरुरत होती है ,जो उसके माता-पिता के पास नहीं हैं | “काश उसे छात्रवृत्ति मिल जाए”| वह विचार कर ही रही थी कि अचानक उसे “छपाक “ पानी में किसी के कूदने की आवाज आई | उसने वहाँ से अपना ध्यान हटाया और पुनः अपनी योजना  पर ध्यान केन्द्रित करने लगी |
उसने फिर से “बचाओ-बचाओ” चिल्लाने की आवाज सुनी | रमती को लगा कि जरुर कोई गड़बड़ है | वह भागकर  हुए तालाब में कूद गई और डूबते बच्चे को किनारे निकाल कर ले आई| | अभी तक उसका मस्तिष्क केवल डूबने वाले को बचाने में लगा था | प्राथमिक उपचार के समय रमती ने देखा कि यह तो निखिल है अशोक चाचा का बेटा | जो अभी कक्षा दस में है | इसकी तो परीक्षा आने वाली हैं और यह इस हाल में! यह कदम निखिल ने क्यों उठाया ? रमती का दिमाग घूम रहा था | खैर वह निखिल को घर तक ले आई | तब तक निखिल के डूबने तथा रमती द्वारा उसे बचाने की बात पूरे गाँव में आग की तरह फैल चुकी थी |
अशोक चाचा-चाची निखिल के इस कदम से बदहवास से थे | वे हैरान थे कि निखिल ने यह कदम क्यों उठाया | उन्हें यह तो पता था कि निखिल की बोर्ड की परीक्षा आरम्भ होने वाली है और उसी ने बताया था कि उसकी तैयारी कोई ख़ास नहीं हो पा रही है | उन्होंने निखिल को कुछ न कहा न कुछ पूछा बल्कि रमती को निखिल की जान बचाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद दिया | उस दिन तो रमती ने भी निखिल से कोई बात नहीं की ,किन्तु उसने मन ही मन निश्चय किया कि वह इस विषय में निखिल से बात अवश्य करेगी | गाँव में चारों तरफ  रमती की बहादुरी की चर्चा हो रही थी | बड़े क्या ,बूढ़े क्या ,नौजवान, बच्चे  सभी की जुबान पर रमती की बहादुरी की चर्चा थी | वहीँ रमती के माता-पिता अपनी बेटी की प्रशंसा सुन-सुनकर गौरवान्वित हो रहे थे |
एक दिन मौका देखकर रमती ने निखिल से “उस घटना ” के बारे में बात की तो निखिल रो पड़ा | उसने रमती के सामने अपने मन की सारी बात रख दी | उसकी बातें सुनकर रमती हतप्रभ रह गई | निखिल भी डॉ बनना चाहता है किन्तु उसके माता-पिता भी आर्थिक रूप से कमजोर हैं | वह यह तो सोच रहा था कि मेडिकल की पढाई में पैसा बहुत लगेगा तो कहाँ से आएगा किन्तु यह नहीं सोचा उसने कि इसके लिए कक्षा दस की पढाई भी अत्यावश्यक है | जब दसवीं ही पास नहीं करेगा तो आगे की पढाई कैसे करेगा | रमती ने उसे समझाया ,कहा अभी भी बहुत समय है | तुम चाहो तो सब कुछ हो सकता है ,दृढ निश्चय के साथ संकल्प करो और अपने उददेश्य को पाने के लिए पूरे मन से जुट जाओ | सफलता तुम्हारे पीछे स्वयं आएगी | “जीवन समाप्त करना कायरों का काम है , कठिनाइयों में रास्ता खोजना ही बहादरी है |” रमती की बातें इतनी प्रभावशाली थीं कि निखिल के मन घर कर गई | एक नई चेतना ,नया आत्मविश्वास से भरा नजर आ रहा था निखिल | एक दृढ संकल्प के साथ उसने पढ़ाई आरम्भ की | रमती ने उसे आश्वासन दिया कि वह हर संभव उसकी सहायता करेगी | बस निखिल को अपने-आप पर भरोसा रखना है |
गाँवभर में रमती की बहादुरी की चर्चा तो थी ही , इस बार सरपंच जी ने छब्बीस जनवरी पर सम्मानित होने वाले बहादुर बच्चों के नाम में रमती का नाम भेज दिया | जब दिल्ली पत्र पँहुचा तो कुछ ही दिनों के बाद निरिक्षण के लिए एक टीम गाँव आ पहुँची | सारी खोजबीन के पश्चात टीम ने सब कुछ सही पाया तो रमती को बहादुरी का पुरस्कार मिलना निश्चित हो गया | दिसम्बर का महिना चल रहा था | बस अब कुछ दिनों की बात है ,हम सब टी वी पर रमती को देखेंगे | सबकी यही सोच थी ,नये वर्ष से ज्यादा रमती को टी वी पर देखना और राष्ट्रपति से पुरस्कार लेते हुए देखने की लालसा हर ग्रामवासी की थी | हो भी क्यों न रमती के कार्यों से सबका मस्तक जो ऊँचा हो रहा है |

आखिर वो दिन भी आ ही | सभी बहादुर बच्चों के साथ रमती को बहादुरी का पुरस्कार मिला | माता-पिता गर्व प्रसन्न हो रहे थे | गाँव लौटने पर रमती का स्वागत ढ़ोल-नगाड़े के साथ हुआ | पूरे गाँव में उत्सव का माहौल था | निखिल,चाचा-चाची सब उसके स्वागत में तत्पर थे | निखिल की जान बचाने के लिए मानो खुले ह्रदय से दुआ एवं धन्यवाद दे रहे थे | निखिल  रमती का आभार प्रकट कर रहा था | रमती पहले से ही सबकी प्रिय थी फिर आज की बात तो निराली ही थी | रमती ने भी सबका मान रखा और पुरस्कार की राशि गाँव के विकास के लिए दे दी |  

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