Wednesday, 17 January 2018

छोटा मुन्नू, काम बड़े 
मुन्नू का परिवार साधारण था | पिताजी सब्जी बेचने का काम करते थे और माँ साड़ियों में फौल-पीको का काम करती थीं | मुन्नू की एक बहन थी जो उससे लगभग चार साल बड़ी थी और एक भाई जो उससे तीन साल छोटा था | माता-पिता अपने-अपने काम तथा परिवार के प्रति पूरी तरह समर्पित थे |तीनों भाई-बहन पढ़ाई के साथ-साथ समय-समय पर माता-पिता की सहायता भी करते थे | मुन्नू छुट्टी वाले दिन पिताजी की साथ थोक मंडी जाकर सब्जी लाता और दुकान लगाने में मदद करता | दोपहर में पिताजी को आराम करने के लिए घर भेज स्वयं दुकान संभालता | इसी प्रकार दीदी भी माँ के काम में हाथ बँटाती | जिन्दगी ठीक चल रही थी | माता-पिता अपने बच्चों के व्यवहार तथा उन्नति से संतुष्ट थे | तीनों ही बच्चों ने संस्कार तो मानो घुट्टी के साथ ही पी लिए थे | उनके व्यवहार तथा आचरण से लगता नहीं था कि उनके माता-पिता दोयम दर्जे का कार्य करते हैं | विद्यालय या अन्य कहीं पूछे जाने पर मन्नू बड़े ही फक्र से अपने माता-पिता के बारे में बताता, वह बिलकुल भी नहीं छुपाता उनके कार्य को और न ही उसे लज्जा महसूस होती | बल्कि वह कहता कि “ मेरे माता-पिता जो कार्य कर रहे हैं वह कोई छोटा नहीं है ,आखिर वे हम बच्चों के लिए ही तो इतना परिश्रम कर रहे हैं, तो हम बच्चों का भी कर्त्तव्य है कि हम उनके सपने साकार करें”| वह बड़े ही गर्व से कहता “ देखना मैं एक दिन इंजीनियर बनूँगा, आई-आई टी कानपुर में पढूँगा”| उसके आत्मविश्वास को देख माता-पिता ख़ुशी से फूले नहीं समाते | वे ईश्वर से प्रार्थना करते कि ईश्वर उनके बच्चों की हर इच्छा को पूरा करें |
मुन्नू का परिवार एक गरीब बस्ती में रहता था | एक दिन जब मुन्नू विद्यालय जा रहा था तो उसने देखा कि खुदाई करने की मशीनें आ रहीं हैं | उसकी बस्ती में एक बहुमंजिला सरकारी भवन बनाने का कार्य शुरू होने जा रहा था ,आज भूमि पूजन था | यह एक बहुत बड़ी परियोजना थी , जिसमें गरीबी की रेखा से नीचे लोगों के आवास एवं रोजगार हेतु कार्य आरम्भ होने जा रहा था | लौटने पर उसने देखा कि खुदाई का काम चालू हो चुका है| रात होने पर मजदूरों ने मशीनें एक तरफ लगाईं और चले गए | बहुत थोड़ा ही काम हुआ था , दुर्घटना की कोई संभावना नहीं थी | दूसरे दिन निर्धार्रित समय पर काम चालू हो गया | मुन्नू जब विद्यालय से लौटा मजदूर खाना खा रहे थे और एक बहुत बड़ा गढ्डा खुद चुका था | उसे देखते ही मुन्नू के दिमाग में बिजली सी कौंध गई कि इसमें तो कोई भी गिर सकता है, जान जा सकती है किसी की | कुछ करना चाहिए | क्योंकि मुन्नू ने टी वी पर देख और सुन रखा था कि “गढ्डे में गिरकर एक मासूम की मौत”|
इस तरह की घटनाएँ आए दिन होती रहती हैं | मुन्नू ने अपना बस्ता एक तरफ रखा और तुरंत अपने दोस्तों के साथ मिलकर पेड़ों की टहनियों से गढ्डे की घेराबंदी कर दी और लोगों के आने जाने का रास्ता बदल दिया | क्योंकि बच्चों का विद्यालय से वापस आना शुरू हो चुका था |
जब सुपरवाइजर का ध्यान उस तरफ गया तो वह हक्का-बक्का रह गया कि उसके आदमियों ने जो भूल की थी उसे इन छोटे बच्चों ने कैसे सुधारा| वह मुन्नू और उसके दोस्तों से बहुत खुश हुआ और अपने आदमियों पर बरसने लगा कि “ तुम लोगों ने खाने पर जाने से पहले - इस तरफ कोई न आए काम चालू है का बोर्ड क्यों नहीं लगाया ?” मुन्नू ने उन्हें रोकते हुए कहा कि “ अंकल इन्हें कुछ न कहिये क्योंकि दिन भर लगातार काम करने पर जो भूख लगती है तो कुछ याद नहीं रहता, इन्हें खाना खाने दीजिये ये सब  मेहनत करके थक गए हैं |” मुन्नू ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि “ हम भी तो इस देश के नागरिक हैं हमारा  भी तो कुछ कर्त्तव्य है |” छोटे मुन्नू की बड़ी बातें सुपरवाइजर को छू गई| उसने मुन्नू और उसकी टीम को ह्रदय से धन्यवाद दिया और कहा कि “आज तुम लोगों के कारण बड़ा हादसा होने से टला है, क्योंकि यह समय तो बच्चों के विद्यालय से घर लौटने का है और घर आने की ख़ुशी में बच्चे जिस तरह दौड़ते हैं बस .................... बाप रे ! कुछ भी हो सकता था |” उसने मुन्नू और उसके दोस्तों को एक-एक चौकलेट दी और उन सबसे पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं | सबने अपने-अपने सपने साझा किए | सुपरवाइजर अंकल ने सबको आशीर्वाद दिया कि “ तुम सब एक दिन जरूर सफलता प्राप्त करोगे | बस ईमानदारी से कार्य करते रहो और अपने कर्तव्यों का पालन करना , सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी |”
सुपरवाइजर मुन्नू और उसकी टीम से अत्यधिक प्रभावित थे ,उनके  मन में भी इन बच्चों तथा इनके परिवारों के लिए कुछ करने की प्रबल इक्छा जागृत हो रही थी | बहुत विचार करने के बाद वे इस निष्कर्ष पर  कि इस परियोजना में वे एक पार्क तथा एक पुस्तकालय भी बनवाने की योजना के लिए सरकार से आवेदन करेंगे | उन्होंने इसे पूरा करने के लिए अथक प्रयास किए | उनके प्रयास से बच्चों  तथा वृद्धों के लिए पार्क भी बना तथा खाली समय में जो लोग ज्ञानवर्धन हेतु पढ़ाई करना चाहते हैं उनके लिए पुस्तकालय में सभी सुविधाओं की व्यवस्था भी हो गई | इस प्रकार मुन्नू की होशियारी के कारण सभी की सुरक्षा के प्रति जागरूकता तो बढ़ी ही साथ ही उनके लिए उन्नति के द्वार भी खुल गए |   
  

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